M N Dutt
On my term of restraint having been complete, that lord of the gods Maheśvara with a gratified heart addressed me, saying.
पदच्छेदः
| समाप्ते | समाप्त (√सम्-आप् + क्त, ७.१) |
| नियमे | नियम (७.१) |
| तस्मिंस्तत्र | तद् (७.१)–तत्र (अव्ययः) |
| देवो | देव (१.१) |
| महेश्वरः | महेश्वर (१.१) |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| प्रीतेन | प्रीत (√प्री + क्त, ३.१) |
| मनसा | मनस् (३.१) |
| प्राह | प्राह (√प्र-अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | मा | प्ते | नि | य | मे | त | स्मिं |
| स्त | त्र | दे | वो | म | हे | श्व | रः |
| प्री | तः | प्री | ते | न | म | न | सा |
| प्रा | ह | वा | क्य | मि | दं | प्र | भुः |