M N Dutt
Thereat, Brahmä along with the deities gladly said to Vaiśravana in a gratified spirit, Very well!
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| वैश्रवणं | वैश्रवण (२.१) |
| परितुष्टेन | परितुष्ट (√परि-तुष् + क्त, ३.१) |
| चेतसा | चेतस् (३.१) |
| ब्रह्मा | ब्रह्मन् (१.१) |
| सुरगणैः | सुर–गण (३.३) |
| सार्धं | सार्धम् (अव्ययः) |
| बाढम् | बाढ (१.१) |
| इत्येव | इति (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| हृष्टवत् | हृष्ट (√हृष् + क्त)–वत् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | ऽब्र | वी | द्वै | श्र | व | णं |
| प | रि | तु | ष्टे | न | चे | त | सा |
| ब्र | ह्मा | सु | र | ग | णैः | सा | र्धं |
| बा | ढ | मि | त्ये | व | हृ | ष्ट | वत् |