M N Dutt
Hearing the words of Rāghava, the ascetic Agastya, having six sorts of wealth, laughing said, like to Brahmā, speaking to Rudra
पदच्छेदः
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| अगस्त्यो | अगस्त्य (१.१) |
| भगवान् | भगवत् (१.१) |
| ऋषिः | ऋषि (१.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामं | राम (२.१) |
| प्रहसन् | प्रहसत् (√प्र-हस् + शतृ, १.१) |
| पितामह | पितामह (१.१) |
| इवेश्वरम् | इव (अव्ययः)–ईश्वर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | व | स्य | व | चः | श्रु | त्वा |
| अ | ग | स्त्यो | भ | ग | वा | नृ | षिः |
| उ | वा | च | रा | मं | प्र | ह | स |
| न्पि | ता | म | ह | इ | वे | श्व | रम् |