तच्छ्रुत्वा भाषितं तस्य गम्भीरार्थपदं महत् ।
तथ्यं ब्रूहीति सौमित्रिः सूतं वाक्यमथाब्रवीत् ॥
तच्छ्रुत्वा भाषितं तस्य गम्भीरार्थपदं महत् ।
तथ्यं ब्रूहीति सौमित्रिः सूतं वाक्यमथाब्रवीत् ॥
M N Dutt
Hearing these grave and important words of Sumantra, Laksmana ordered him to relate.पदच्छेदः
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| भाषितं | भाषित (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| गम्भीरार्थपदं | गम्भीर–अर्थ–पद (२.१) |
| महत् | महत् (२.१) |
| तथ्यं | तथ्य (२.१) |
| ब्रूहीति | ब्रूहि (√ब्रू लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| सौमित्रिः | सौमित्रि (१.१) |
| सूतं | सूत (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अथाब्रवीत् | अथ (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्छ्रु | त्वा | भा | षि | तं | त | स्य |
| ग | म्भी | रा | र्थ | प | दं | म | हत् |
| त | थ्यं | ब्रू | ही | ति | सौ | मि | त्रिः |
| सू | तं | वा | क्य | म | था | ब्र | वीत् |