त्वत्समीपे तु ये सत्त्वा वासमेष्यन्ति तां निशाम् ।
अवध्याः पांसुवर्षेण ते भविष्यन्ति नित्यदा ॥
त्वत्समीपे तु ये सत्त्वा वासमेष्यन्ति तां निशाम् ।
अवध्याः पांसुवर्षेण ते भविष्यन्ति नित्यदा ॥
M N Dutt
Within seven nights whoever shall approach you, shall be destroyed with this downpour of dust.पदच्छेदः
| त्वत्समीपे | त्वद्–समीप (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
| सत्त्वा | सत्त्व (१.३) |
| वासम् | वास (२.१) |
| एष्यन्ति | एष्यन्ति (√इ लृट् प्र.पु. बहु.) |
| तां | तद् (२.१) |
| निशाम् | निशा (२.१) |
| अवध्याः | अवध्य (१.३) |
| पांसुवर्षेण | पांसु–वर्ष (३.१) |
| ते | तद् (१.३) |
| भविष्यन्ति | भविष्यन्ति (√भू लृट् प्र.पु. बहु.) |
| नित्यदा | नित्यदा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | त्स | मी | पे | तु | ये | स | त्त्वा |
| वा | स | मे | ष्य | न्ति | तां | नि | शाम् |
| अ | व | ध्याः | पां | सु | व | र्षे | ण |
| ते | भ | वि | ष्य | न्ति | नि | त्य | दा |